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Saturday, April 5, 2014

भाजपा का फेकूफेस्टो



भाजपा का फेकूफेस्टो 


आज कल हर पार्टी चुनावमे जितने के लिए अपनी पार्टी का घोषणापत्र लोगो के सामने रखती हें और चुनाव के बाद अपने किये हुए वादे को पूरा करनेमे लग जाती हें लेकीन भारतीय जनता पार्टी का केवल एक ही घोषणापत्र हें यानिकी फेकूफेस्टो जब फेकू कही रेली को संबोधित करते हें ! इतिहास करोका मानना हें की जब-जब फेकू की रैली होती है, तब तब इतिहास चुल्लू भर पानी में डूब मरता है। क्युकी इतिहास के बारेमे कुछ नहीं पता !

अगर फेकुजी विकास न करते तो सारे गुजराती आज भी पहिये बनाना और पत्थर से आग जलाना ही सीख रहे होते। वह बार बार अपनी रेलियो में कहते हें में ने विकास किया हे ! औरफेकू अपने आपको विकास पुरुस कहेता हे गुजरात का इतना विकास किया गया है कि वहां सिर्फ तस्वीरों में मच्छर और मक्खी बचे हैं। लोग तो फोटोमें आते ही नहीं हे ! कुछ बुजुगो का कहने हे की बचपन में मोदी इतिहास की किताब बेचकर 'सोन- पापड़ी' खाया करते थे। इसीलिए आज सिर्फ नरेंद्र मोदी इतिहास के पेपर में भी बांग्लादेश का मानचित्र बना कर आते हें ! फेकुजी अक्सर अपने रेलियोमे कहते हेंकी गुजरात में भ्रष्टाचार नहीं हें ! और कहते हे “ में खता नहीं हु और खाने देता भी नहीं ” तो फिर गुजरात के हाल में हुई तलाती की भरती में क्या हुव था जवाब दो ! और रेलीयो में कहते हें गुजरात में हम कंप्यूटर को कहते हे की सबसे अछे उमेदवार की हमें लिस्ट बनाकर दे अरे फेकुजी गुजरात में भ्रष्टाचार रोकने के लिए कंप्यूटर का भी इंटरव्यू लिया जाता है। क्या

फेकूजी इतना क्यों फेकते हें ! अगर आपकी सरकार आएगी तो आप हमें ये सब अधिकार देंगे ?

RTS: Right To Snoop

RTR:  Right To Riots

RTB:  Right To Bluff

RTIS: Right To Insult Seniors

    और चुनाव के बाद अपने किये हुए वादे को पूरा करनेमे लग जायेंगे क्या ? हमें नहीं चाहिए ऐसा घोषणापत्र...

56" के सीने वाले की बोलती बंध??


इसे कहते हैं ५६ इंच की छाती

सच्चाई जरूर कड़वी होती है, मगर आज नहीं तो कल लोगों को उसे स्वीकारना ही पड़ता है। बहुत दहाड़ते हैं फेकूजी। गुजरात के शेर। 56 इंच के सीने वाले। गरजते हुए फेंकू शेर से कम लग रहे हैं क्या? ऐसा दहाड़ना, ऐसा गरजना की अच्छे अच्छों की रूह कांप जाए। और क्यों न हो? कौन भूल सकता वो दिन जिसे आज मीडिया की धुआंदार बमबारी भुला देने पर अमादा है। अंग्रेजी में एक शब्द है इस तरह की बमबारी के लिए – carpet bombing, यानि कालीन कि माफ़िक बम से ज़मीन को ढक देना।  पिछले कुछ वक़्त से हमारी इन्द्रियों पर जो हमला हो रहा, कुछ इसी किस्म का है। मगर वो लाख चाहे कि इन महाशय की सारी करतूतें भुला दी जाएँ, ऐसा कैसे हो सकता है? जब जब यह शक्ल सामने आती है तब तब नाखूनों में खून दिखाई दे जाता है। वैसे भूलने भुलाने वाले भी अजीब मिट्टी के बने होते हैं। अब देखिये न जी, हिन्दुओं से कहते हैं की चार सौ साल पुरानी मस्जिद भी मत भूलना बाबर का बदला लेना है और मुसलमानों से कहते हैं इतनी पुरानी बात – 2002 का रोना अब भी रोये जा रहे हो? इसे कहते हैं चित भी मेरी, पट भी मेरी और अंटा मेरे बाप का 
यह अकारण नहीं कि उन्हें सरे लोग 'फेंकू' नाम से सम्बोधित करने लगे है। पर मज़े की बात तो यह है कि जैसे की यह शेर अकेले में धर लिया जाता है जहाँ खुले मैदान में दहाड़ना क़ाफ़ी नहीं, जहाँ सवाल का जवाब देना ही होता है, जहाँ चालाकी से किसी को भी पाकिस्तानी एजेंटवगैरह कहा नहीं जा सकता है वहीँ फेकूराम बगलें झाँकने लगते हैं। घूँट भरते हैं, पानी मांगते हैं और फिर मौन व्रत। एक बार तो स्टूडियो से ही उठ कर चल दिए थे। अभी हाल में हेलिकोप्टर में फँस ही गए तो चेहरा फीका पड़ गया। 
इस आँख मिचौली की ताज़ातरीन मिसाल यह है की मीडिया के पूरे समर्थन से पिछले दो एक बरस में गुजरात के कथित विकासके बारे में जो झूठ फैलाया जा रहा था वो जैसे ही पकड़ में आने लगा वैसे ही गुजरात सरकार ने वो आंकड़े अपनी वेबसईट से हटा लिए। नवभारत टाइम्स की एक रपट के मुताबिक:
फेंकुजी ने  अपनी रैलियों में गुजरात के विकास की खूब मिसाल देते हैं। वे दावा करते हैं कि गुजरात में कृषि विकास दर 11 फीसदी जबकि उनकी अपनी वेबसाइट के मुताबिक यह -1.18 फीसदी है।
आर.टी.आई के ज़रिये इकठ्ठा की गए जानकारी पर आधारित उनकी एक रपट के मुताबिक सिर्फ 2003 से 2007 के बीच 489 किसानों ने खुदकुशी की। असल संख्या जो पुलिस ने एन एह आर सी से जवाब मांगे जाने पर दी वह 563 है। एक मोर्चा और खुल गया है फेकू के ख़िलाफ़। अभी आने वाला एक महीना हर रोज़ नए गुल खिलायेगा। समझ ही सकते हैं मोदी की ख़ामोशी की वजह। मसला सिर्फ 2002 का नहीं है। उनका हर मामला झूठ पर टिका है। किसी एक बात पर भी अगर फँस गए तो क्या होगा? कैसे बनेंगे पी एम? उनके साथ साथ और कितनों के उम्मीदें धरी की धरी रह जायेंगी, क्या पता